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भगवान महावीर की तपस्थली उज्जयिनी का तपोभूमि मंदिर

आचार्य श्री पुष्पदंत सागरजी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री प्रज्ञासागर जी महाराज का वर्ष 2003 में फ्रीगंज स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में चातुर्मास चल रहा था, इसी दौरान मुनिश्री के मन में भगवान महावीर स्वामी की तपोस्थली उज्जैन में ही श्री महावीर तपोभूमि मंदिर के निर्माण का विचार आया जिसे मुनिश्री ने समाजजनों के समक्ष रखा, जिसे समाजजनों ने सहर्ष स्वीकार करते हुए मंदिर निर्माण हेतु योजना तैयार की। इस हेतु सबसे प्रथम भूमि चयन पर विचार किया गया। काफी खोज एवं प्रयास के बाद मुनिश्री ने इंदौर रोड़ स्थित भूमि का चयन किया और देखते ही देखते मुनिश्री के मार्गदर्शन में श्री महावीर तपोभूमि ने अपना भव्य रूप लिया। उज्जैन एक ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरी है भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर तक अनेक महापुरूषों का संबंध उज्जयिनी से रहा है।

सन् 2005 में उज्जैन भगवान महावीर की चरण रज से पावन हुआ जिसमें भगवान महावीर स्वामी के तप की खुशबू सर्वत्र व्याप्त हो सके और दुनिया उज्जयिनी को भगवान महावीर स्वामी की तपोभूमि के नाम से जान सके। श्री सिद्धक्षेत्र के महावीर तपोभूमि उज्जैन-इंदौरा राजमार्ग पर स्थित है। यह उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 08 किलोमीटर और इंदौर से 40 किलोमीटर दूरी पर है। श्री महावीर तपोभूमि में 24 तीर्थकरों की मूर्तियाँ विराजमान होने से यह पुण्य भूमि महातीर्थ हो गई। यहाँ ऋषभदेव से लेकर महावीर स्वामी तक विराजमान है। यहांँ विश्व की पहली रत्न चैबीसी को रत्न मंदिर में विराजमान किया है। श्री महावीर तपोभूमि के प्रणेता मुनिश्री प्रज्ञासागरजी केे सानिध्य में प्रतिवर्ष 26 जनवरी को भगवान श्री महावीर स्वामी का महामस्तकाभिषेक भव्य रूप में किया जाता है। साथ ही विभिन्न धार्मिक आयोजन भी यहाँ समय-समय चलते रहते हैं।

पिकनिक मनाने आते हैं श्रद्धालुजन


शहर की चकाचैंध से दूर शांत वातावरण एवं प्राकृतिक की गोद में स्थापित श्री महावीर तपोभूमि जैन समाज ही नहीं अन्य समाज के श्रद्धालूुओं के लिए भी दर्शनीय स्थल बन गया है।
यहांँ लोग भगवान महावीर स्वामी के दर्शन तो करते ही है साथ ही विशेष दिनों में यहाँ सैर सपाटा करने के साथ ही पिकनिक भी मनाते हैं।
यहा पूरे परिवार के साथ आकर देवदर्शन के साथ ही मनोरंजन भी लोगों को यहाँ खींच लाता है।
यहाँ किफायती दरों में भोजनशाला में भोजन भी उपलब्ध हो जाता है।
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के रूकने की व्यवस्था
मुनिश्री की प्रेंरणा से यहांँ एक भव्य धर्मशाला का भी निर्माण किया गया है, जहाँ लोगों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। आकर्षक एवं एसी रूम में ठहरने के बाद लोग भगवान महावीर स्वामी के दर्शन लाभ प्राप्त कर अपने को धन्य समझते है।